श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर ध्रुव और प्रह्लाद प्रसंगों से श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर
शामली। नारायण कुटुंब ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा व्यास आचार्य श्री चंचल शर्मा ने बाल भक्त ध्रुव एवं भक्त प्रह्लाद के प्रेरणादायी प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भक्ति रूपी प्रेम ही परमात्मा की प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन है।

कथा के दौरान आचार्य श्री ने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति किसी बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम, श्रद्धा एवं सच्ची भक्ति से होती है। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के मध्य आत्मिक प्रेम का दिव्य संबंध है। जब मनुष्य अपने हृदय को अहंकार, छल और कपट से मुक्त कर प्रभु का स्मरण करता है, तब भगवान स्वयं उसके जीवन में प्रकट होने लगते हैं।
इसी भाव को व्यक्त करते हुए आचार्य श्री ने कहा—
“निर्मल मन जन सो मोहि पावा,
मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥”
उन्होंने कहा कि भगवान को केवल निर्मल हृदय और सच्चे प्रेम से ही प्राप्त किया जा सकता है। बालक ध्रुव ने अल्पायु में कठोर तप एवं अखंड भक्ति के माध्यम से भगवान श्रीहरि के दर्शन प्राप्त किए, जबकि भक्त प्रह्लाद ने विपरीत परिस्थितियों में भी नारायण भक्ति का त्याग नहीं किया।
बच्चों में संस्कार और श्रद्धा का संचार आवश्यक

आचार्य चंचल शर्मा ने कहा कि ध्रुव एवं प्रह्लाद के प्रसंग समाज को यह प्रेरणा देते हैं कि बाल्यकाल से ही बच्चों में संस्कार, श्रद्धा एवं भगवान के प्रति प्रेम का संचार किया जाना चाहिए।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्तजन भजन-कीर्तन एवं हरिनाम संकीर्तन में भाव-विभोर दिखाई दिए। पूरा पांडाल भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम का मंच संचालन उत्तम नामदेव द्वारा किया गया। कथा में ट्रस्ट के सदस्य डॉ. सत्यपाल सिंह, सुखबीर भटनागर, पं. विक्रांत, पं. हितेश नवानी, अन्नू मलिक, क्रिश सूर्यदेव एवं समाजसेवी यशपाल पंवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
— अजीत कुमार श्रीवास्तव
न्यूज एडिटर, दैनिक नवचेतन सत्यभाष समाचार पत्र
