वट अमावस्या पर गंगा घाटों पर जुटे हजारों श्रद्धालु
अक्षय वट की परिक्रमा कर महिलाओं ने मांगा अखंड सौभाग्य, मंदिरों में दिनभर चला पूजन और सत्संग
मोरना। तीर्थ नगरी शुकतीर्थ में शनिवार को वट अमावस्या के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई, जबकि महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखकर प्राचीन अक्षय वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
सुबह से ही गंगा घाटों पर स्नान करने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद शुकदेव मंदिर, हनुमद्धाम, गणेश धाम, शिव धाम, दुर्गा धाम, पार्वती धाम, अखंड धाम और गंगा मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन भी कराया।
आश्रमों में गूंजे भजन-कीर्तन और सत्संग
शुकतीर्थ के दंडी आश्रम, महाशक्ति सिद्ध पीठ, श्री महेश्वर आश्रम, तिलकधारी आश्रम, मां पीतांबरा धाम, अखंड धाम, खिचड़ी वाले बाबा आश्रम और मानव निर्माण योग आश्रम में दिनभर धार्मिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और सत्संग प्रवचन आयोजित हुए। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर संतों के प्रवचनों का श्रवण किया।
महिलाओं ने अक्षय वट पर बांधा रक्षा सूत्र
शुकदेव आश्रम स्थित पांडवकालीन प्राचीन अक्षय वट वृक्ष पर महिलाओं की सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखकर वृक्ष की परिक्रमा की, धागा बांधा और दीप प्रज्ज्वलित कर अपने पति की लंबी आयु और सुखमय दांपत्य जीवन की कामना की।
आचार्य सुमन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि वट अमावस्या त्याग, समर्पण और अखंड सौभाग्य का पर्व है। इस दिन वट वृक्ष की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। गंगा घाटों, मंदिरों और प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल तैनात रहा। महिला दरोगा अजय यादव पुलिस टीम के साथ लगातार व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रहीं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
