अप्रभावी दल-बदल कानून पर उठे सवाल, दोबारा जनादेश की मांग
क्रांतिकारी नागरिक दल की बैठक में भ्रष्टाचार, आरक्षण और विभिन्न कानूनों पर हुई चर्चा

शामली। वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में दल-बदल कानून को अप्रभावी बताते हुए क्रांतिकारी नागरिक दल ने इसे राजनीतिक भ्रष्टाचार, अनैतिकता और धनबल को बढ़ावा देने वाला माध्यम करार दिया। अशोक कुमार फौजी की अध्यक्षता में हुई संगठन की बैठक में कहा गया कि मौजूदा समय में सांसदों और विधायकों के लगातार दल बदलने की घटनाएं कानून की खामियों को उजागर कर रही हैं।बैठक में वक्ताओं ने कहा कि दो-तिहाई सदस्यों के आधार पर दल-बदल को वैध ठहराने का प्रावधान लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत साबित हो रहा है। पहले दल-बदल को “अंतरात्मा की आवाज” से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब जनता अंतरात्मा की आवाज और “बिकी हुई आवाज” में फर्क नहीं कर पा रही है।
दल बदलने वालों को दोबारा चुनाव लड़ने की मांग
संगठन ने मांग उठाई कि जो भी जनप्रतिनिधि दल बदलता है, उसे तत्काल अपने पद से इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाकर जनादेश प्राप्त करना चाहिए। साथ ही ऐसे जनप्रतिनिधियों को वेतन, भत्ते और पेंशन जैसी सुविधाओं से भी वंचित किए जाने की बात कही गई।

भ्रष्टाचार को बताया समाज की सबसे बड़ी समस्या
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि भ्रष्टाचार ने समाज की लगभग सभी संस्थाओं में सदाचार को खत्म कर दिया है। उन्होंने गरीबी, कुपोषण और सामाजिक असमानता के लिए भी भ्रष्टाचार को प्रमुख कारण बताया। भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
विभिन्न कानूनों और व्यवस्थाओं पर भी हुई चर्चा
बैठक में आरक्षण व्यवस्था, यूजीसी कानून, एससी-एसटी एक्ट तथा अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक जैसी व्यवस्थाओं और कानूनी प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने इन्हें “समानता विरोधी” बताते हुए इन पर पुनर्विचार और समाप्त किए जाने की आवश्यकता जताई।
बैठक में बैठक में सत्य प्रकाश अग्रवाल ,विनोद अत्रि, श्री सुरेंद्र कुमार जैन ,राजेश गर्ग ,सुभाष शर्मा, मदनपाल आर्य ,अशोक वशिष्ठ ,अजय कुमार, जितेंद्र शर्मा तथा गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। बैठक के अंत में संगठन पदाधिकारियों ने देश में पारदर्शी, जवाबदेह और समानता आधारित व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई।
